गिरिडीह: जिले में सोमवार को वट सावित्री व्रत का पर्व पारंपरिक श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक वट वृक्ष के नीचे सुहागिनों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं सज-धज कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए व्रत और पूजा-अर्चना में जुटी रहीं।
सुहागिनों ने विधि-विधान के अनुसार वट वृक्ष की परिक्रमा की, मौली धागा बांधा और माता सावित्री तथा यमराज की पूजा की। पूजा के उपरांत पंडितों द्वारा सावित्री-सत्यवान की कथा सुनाई गई, जिसमें बताया गया कि कैसे माता सावित्री ने दृढ़ संकल्प और भक्ति से यमराज से अपने पति के प्राण वापस लिए।
पूजा के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और व्रत की पूर्णता की शुभकामना दी। इस दौरान पूरे वातावरण में भक्ति और सांस्कृतिक आस्था की झलक साफ दिखाई दी।
शहर के अलावा गावों में भी इस पर्व की धूम रही। परंपरागत वेशभूषा में सजी महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ इस पर्व को मनाया। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पर्व नारी शक्ति, संकल्प और अपने परिवार के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
मैं अभिमन्यु कुमार पिछले चार वर्षों से गिरिडीह व्यूज में बतौर “चीफ एडिटर” के रूप में कार्यरत हुं,आप मुझे नीचे दिए गए सोशल मीडिया के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।