जिले के पूर्व सहकारिता प्रबंधक सेवा संघ के पेंशनधारियों की आमसभा रविवार को रंजीत गेस्ट हाउस में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता व संचालन याचिकाकर्ता बाबुकीनाथ उपाध्याय ने की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (APEX COURT CIVIL APIL NO.-7357/1996 दिनांक 20/08/1998) के आलोक में पेंशन सहित अन्य लंबित मांगों के समाधान को लेकर रणनीति तय करना था।

बैठक में बताया गया कि झारखंड सरकार द्वारा तीन बार मामलों की समीक्षा की गई, जिसमें प्रभारी आयुक्त सह सचिव, सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार ने आदेश संख्या 530 दिनांक 05/08/2002 के तहत पेंशन निर्गत करने का आदेश दिया था। बावजूद इसके पुराने सेवा की गणना नहीं किए जाने के कारण पेंशन संबंधी लाभ आज तक नहीं मिल पाया है।
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पूर्व के आदेश के अनुपालन में गिरिडीह के 814 कर्मियों को दिनांक 30.09.2003 को स्थानांतरित कर अन्य सरकारी कार्यालयों में योगदान दिलाया गया था, लेकिन उनका पुराना सेवाकाल जोड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इस कारण पेंशन व अन्य लाभ प्रभावित हुए हैं।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि उक्त अनुचितता के खिलाफ पूर्व प्रबंधकों ने माननीय उच्च न्यायालय, झारखंड में वाद दायर किया था। WPS NO.-5598/21 में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि पेंशन का निर्धारण पुरानी सेवा को जोड़ते हुए किया जाए। बावजूद इसके सरकार ने आदेश का अनुपालन नहीं किया।
इस बीच याचिकाकर्ता बाबुकीनाथ उपाध्याय एवं अन्य द्वारा Counter Civil Appeal No.-885/2025 उच्च न्यायालय में दायर किया गया है। साथ ही, श्री बाबुकीनाथ उपाध्याय एवं अन्य द्वारा WPS NO.-1003/2023 भी दायर किया गया है जिसमें कुल 53 लोग सम्मिलित हैं।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार सर्वोच्च व उच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्ण अनुपालन नहीं करती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। वक्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि सभी पेंशनधारियों को उनका वैधानिक हक तत्काल दिया जाए।
बैठक में श्री अशोक कुमार, श्री रामेश्वर सिंह सहित दर्जनों पेंशनभोगी उपस्थित रहे और उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की कि उन्हें न्याय दिलाया जाए।

मैं अभिमन्यु कुमार पिछले चार वर्षों से गिरिडीह व्यूज में बतौर “चीफ एडिटर” के रूप में कार्यरत हुं,आप मुझे नीचे दिए गए सोशल मीडिया के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।