अगर आपकी निजी फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर हो जाए वायरल, तो घबराएं नहीं – जानिए कानूनी और डिजिटल उपाय

Pintu Kumar
7 Min Read
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आज हम उस समय में जी रहे हैं, जहां हर किसी की ज़िंदगी किसी न किसी रूप में इंटरनेट से जुड़ी है। चाहे वह सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरें हों, किसी दोस्त के साथ ली गई वीडियो क्लिप हो या फिर मोबाइल फोन की गैलरी में सुरक्षित रखे गए कुछ निजी पल। लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल दुनिया का विस्तार हुआ है, वैसे-वैसे हमारी निजता पर खतरे भी बढ़े हैं। आज बिना इजाजत किसी की भी प्राइवेट फोटो या वीडियो का वायरल हो जाना एक गंभीर समस्या बन चुकी है। यह कभी मज़ाक के रूप में होता है, कभी किसी के बदले की भावना से किया जाता है, तो कई बार यह साइबर अपराधियों की सोची-समझी साजिश होती है।

लेकिन इस कठिन परिस्थिति में सबसे जरूरी है घबराना नहीं, बल्कि जानकारी के साथ कदम उठाना। भारत का साइबर कानून, अंतरराष्ट्रीय डिजिटल नियम और तकनीकी सहायता ऐसे मामलों में पीड़ित के साथ खड़े हैं। अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो गया है, तो सबसे पहले आपको धैर्य रखना होगा और स्थिति को समझदारी से संभालना होगा।

सबसे पहले आपको यह समझना जरूरी है कि इंटरनेट पर वायरल हुआ कोई भी कंटेंट एकदम से नहीं हटता। इसलिए आपको शुरुआत उस सामग्री को संकलित करने से करनी होगी। जिस भी प्लेटफॉर्म पर आपकी फोटो या वीडियो डाली गई है, उसका लिंक (URL) और उस कंटेंट के स्क्रीनशॉट तुरंत सेव कर लें। ये बाद में रिपोर्ट दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई में अहम भूमिका निभाते हैं।

इसके बाद, आप सीधे उस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। Facebook, Instagram, Twitter (अब X), Reddit, YouTube जैसे सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के पास “Report” करने की सुविधा होती है। आप “privacy violation”, “unauthorized content” या “nudity without consent” जैसे विकल्प चुनकर रिपोर्ट कर सकते हैं। ये कंपनियां आम तौर पर ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेती हैं और अगर मामला सही पाया गया, तो फोटो या वीडियो को हटा दिया जाता है।

लेकिन अगर मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है और Google Search पर भी आपके नाम या फोटो से जुड़ा कुछ दिखाई दे रहा है, तो वहां से भी उसे हटाया जा सकता है। Google के पास एक टूल है – “Remove Outdated Content Tool”, जिसकी मदद से आप सर्च रिजल्ट से पुराने या अवांछित कंटेंट को हटाने का अनुरोध कर सकते हैं। इसके अलावा, Google का “Personal Content Removal” फॉर्म भरकर भी आप अनुरोध कर सकते हैं कि बिना अनुमति के डाले गए आपकी पहचान से जुड़ी जानकारी को सर्च से हटाया जाए।

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अगर आपने जो तस्वीर खिंचवाई है, वह आपकी अनुमति के बिना इंटरनेट पर डाली गई है, तो आप कॉपीराइट एक्ट के तहत DMCA (Digital Millennium Copyright Act) नोटिस भेज सकते हैं। भारत समेत कई देशों में यह एक्ट मान्य है और इसके तहत वेबसाइट्स को कानूनी रूप से उस कंटेंट को हटाना होता है, जो मूल व्यक्ति की सहमति के बिना अपलोड किया गया हो। क्योंकि तस्वीर का मालिक वही होता है, जिसने उसे खिंचवाया है या जिसकी पहचान उस तस्वीर में है।

तकनीक के इस युग में कुछ ऐसे टूल्स भी हैं, जो विशेष रूप से निजी फोटो या वीडियो को इंटरनेट से हटाने में मदद करते हैं। StopNCII.org और TakeItDown.org ऐसे ही दो प्रमुख प्लेटफॉर्म हैं, जो मुफ्त में और पूरी गोपनीयता के साथ यह सेवा प्रदान करते हैं। ये टूल्स किसी भी व्यक्ति की तस्वीर को डिजिटल रूप से पहचान कर यह सुनिश्चित करते हैं कि वह अन्य वेबसाइटों पर अपलोड न हो सके। खास बात यह है कि इनका उपयोग करते समय आपकी पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहती है।

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी तस्वीर और कहां-कहां अपलोड की गई है, तो इसके लिए Google Reverse Image Search या PimEyes जैसे टूल्स का उपयोग किया जा सकता है। यह तकनीक तस्वीर को स्कैन कर इंटरनेट पर उसके दूसरे स्रोतों का पता लगाती है।

हालांकि, अगर मामला ज्यादा गंभीर है — जैसे कि किसी ने जानबूझकर आपकी छवि को धूमिल करने, ब्लैकमेल करने, धमकी देने या अश्लील फोटो फैलाने के इरादे से कंटेंट वायरल किया है — तो फिर बात केवल डिजिटल कार्रवाई तक सीमित नहीं रह जाती। ऐसे मामलों में तत्काल अपने नजदीकी साइबर क्राइम थाना में रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए। भारत सरकार ने साइबर अपराधों के लिए 24×7 राष्ट्रीय पोर्टल www.cybercrime.gov.in की व्यवस्था की है, जहां ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। साथ ही, हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

भारत का आईटी एक्ट 2000 और हाल में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) में ऐसी घटनाओं के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान हैं। आईटी एक्ट की धारा 66E (निजता का उल्लंघन), धारा 67 (अश्लील सामग्री का प्रकाशन) और 67A (यौन स्पष्ट सामग्री का प्रकाशन) के तहत दोषियों को तीन से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

डिजिटल दुनिया जितनी तेज़ी से हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रही है, उतना ही जरूरी है कि हम अपनी निजी जानकारी को लेकर सतर्क रहें। अपनी तस्वीरें, वीडियो या कोई भी निजी डेटा इंटरनेट पर साझा करने से पहले दो बार सोचें और अपने फोन, क्लाउड या सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत रखें।

लेकिन अगर फिर भी कभी आपकी निजता पर हमला हो जाए, तो याद रखें – यह आपकी गलती नहीं है। कानून, प्लेटफॉर्म्स और तकनीक – सब आपके साथ हैं। जरूरत है सिर्फ सही जानकारी, सही वक्त पर कदम उठाने और अपने अधिकारों को पहचानने की।

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