झारखंड में 444 बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू, खनन विभाग ने भेजा मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट…

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झारखंड के सभी जिलों में बालू घाटों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। खान एवं भूतत्व विभाग ने इसके लिए सभी जिलों को मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट भेज दिया है और निर्देश दिया है कि इसी आधार पर ई-ऑक्शन की प्रक्रिया पूरी करायी जाए। विभाग का कहना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

रांची जिले में भी तैयारी शुरू

राजधानी रांची में भी नीलामी प्रक्रिया की तैयारी तेज हो गई है। यहां कुल 19 बालू घाटों का टेंडर किया जाना है। जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि सितंबर के पहले सप्ताह तक टेंडर जारी कर दिया जाएगा।

जेएसएमडीसी से विभाग को मिली जिम्मेदारी

गौरतलब है कि अब तक बालू घाटों का संचालन अधिकार झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) के पास था। निगम का कार्यकाल 15 अगस्त को समाप्त हो गया और उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके बाद अब सभी घाटों का स्वामित्व खान एवं भूतत्व विभाग को सौंप दिया गया है।

फीस और बोली की शर्तें

मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के अनुसार, बोली लगाने वालों को रिजर्व प्राइस के अनुरूप प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी।

• 70 लाख रुपये तक के घाटों के लिए 600 रुपये

• 70 लाख से तीन करोड़ रुपये तक के घाटों के लिए 3600 रुपये

• तीन करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाले घाटों के लिए 6000 रुपये

इसके अलावा, बोली में भाग लेने के लिए न्यूनतम दर का 10 प्रतिशत राशि इएमडी (Earnest Money Deposit) के रूप में जमा करना अनिवार्य होगा। सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को ही घाट का संचालन अधिकार मिलेगा। यदि कोई सफल बोलीदाता घाट संचालन से इनकार करता है, तो उसकी जमा राशि जब्त कर ली जाएगी।

डीएमएफटी और अन्य शुल्कों का भुगतान जरूरी

सफल बोलीदाता को कुल बोली राशि का 10 प्रतिशत जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के खाते में जमा करना होगा। इसके साथ ही रॉयल्टी, जीएसटी और अन्य शुल्क भी जिला खनन कार्यालय में निर्धारित समय पर अदा करने होंगे। भुगतान तीन किस्तों में होगा—

• पहली किस्त (50%) बोली लगने के तुरंत बाद,

• दूसरी किस्त (25%) 15 अक्टूबर तक,

• तीसरी किस्त (25%) 15 जनवरी तक।

समय पर भुगतान नहीं करने पर घाट संचालन की ई-चालान सुविधा बंद कर दी जाएगी।

नियमों का पालन अनिवार्य

खनन पट्टाधारी को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मिली सभी स्वीकृतियों का पालन करना होगा। खनन की अधिकतम गहराई तीन मीटर तक ही होगी या फिर जब तक नदी का तल न दिख जाए। परिवहन केवल सरकार द्वारा जारी ई-चालान से ही किया जा सकेगा। साथ ही, सभी पट्टाधारी को मासिक प्रगति रिपोर्ट जिम्स पोर्टल पर ऑनलाइन जमा करनी होगी।

इसके अतिरिक्त, अगले वर्ष खनन की अनुमति जारी रखने के लिए समय पर नवीनीकरण का आवेदन करना भी अनिवार्य होगा।

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