गिरिडीह: अवैध पत्थर खदान का काला खेल, मजदूर की मौत के बाद शव छुपाने की कोशिश, प्रशासन की भूमिका पर सवाल

Pintu Kumar
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गिरिडीह: झारखंड में अवैध खनन का काला खेल लगातार मजदूरों की जान ले रहा है। कभी कोयला तो कभी पत्थर, हर जगह खनन माफिया और प्रशासन की मिलीभगत से यह धंधा बेरोकटोक चल रहा है। ताजा मामला गिरिडीह जिले के खोरीमहुआ अनुमंडल अंतर्गत परसन ओपी थाना क्षेत्र के पंदनाटांड़ का है, जहां सोमवार को अवैध पत्थर खदान में काम कर रहे एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई।

मृतक की पहचान और हादसा

मृतक की पहचान बालकिशुन मेहता (50 वर्ष), निवासी बेराडीह, डोमचांच (कोडरमा) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, बालकिशुन खदान में काम कर रहा था, तभी ड्रिलिंग मशीन से गिरकर उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि जिस खदान में यह हादसा हुआ, उसकी लीज तीन साल पहले ही खत्म हो चुकी थी, बावजूद इसके खनन माफिया यहां खुलेआम पत्थर का उत्खनन करा रहा था।

शव गायब करने की कोशिश

हादसे के बाद खदान संचालक और उसके गुर्गों ने शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। लेकिन किसी मजदूर ने घटना की सूचना मृतक के परिजनों तक पहुँचा दी। परिजन और ग्रामीण जब खदान पर पहुँचे, तब जाकर मामला सार्वजनिक हुआ।

पुलिस की चुप्पी और सौदेबाजी

सूचना मिलने के बावजूद परसन थाना पुलिस कई घंटों तक मूकदर्शक बनी रही। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। लेकिन यहाँ भी माइंस संचालक को बचाने की कोशिशें जारी रहीं।

चौंकाने वाली बात यह रही कि थाना परिसर में ही खदान संचालक और उसके आदमी शव पर सौदेबाजी करते नजर आए। परिजनों के आंसू और चीख-पुकार के बीच देर रात तक 5 लाख रुपये मुआवजे पर ‘समझौता’ तय कराया गया और परिजनों को आवेदन वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा।

अवैध खनन पर सरकार-प्रशासन मौन

यह कोई पहला मामला नहीं है। गिरिडीह, कोडरमा और हजारीबाग की सीमाओं पर लंबे समय से अवैध खनन का कारोबार फल-फूल रहा है। लीज खत्म होने के बाद भी खदानों में खुलेआम उत्खनन जारी है। प्रशासन और खनन विभाग की चुप्पी ने माफियाओं के हौसले बुलंद कर रखे हैं।

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