रांची झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नौवीं और 11वीं कक्षा के लाखों छात्र-छात्राओं के रजिस्ट्रेशन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कारण है—शीतकालीन अवकाश और रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा का आपसी टकराव। स्कूलों में 28 दिसंबर से शीतकालीन अवकाश घोषित है, जो 5 जनवरी तक चलेगा, जबकि इसी अवधि में नौवीं और 11वीं कक्षा के रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं।
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 11वीं कक्षा के छात्रों का रजिस्ट्रेशन 18 दिसंबर से शुरू हुआ है, जिसकी अंतिम तिथि 2 जनवरी तय की गई है। वहीं, नौवीं कक्षा का रजिस्ट्रेशन 19 दिसंबर से प्रारंभ हुआ है, जिसकी अंतिम तिथि 5 जनवरी रखी गई है। इस प्रकार, शीतकालीन अवकाश के दौरान ही रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा समाप्त हो रही है, जिससे छात्र, शिक्षक और स्कूल प्रबंधन सभी असमंजस में हैं।
केवल पांच दिन हो सका रजिस्ट्रेशन
अब तक स्कूलों में केवल पांच दिनों तक ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो सकी है। शीतकालीन अवकाश शुरू होने से पहले मात्र दो कार्यदिवस शेष हैं। इतने कम समय में नौवीं और 11वीं के लाखों छात्रों का रजिस्ट्रेशन पूरा होना लगभग असंभव माना जा रहा है।

आंकड़ों की बात करें तो राज्य भर में नौवीं कक्षा में लगभग पांच लाख और 11वीं कक्षा में करीब 3.50 लाख छात्र-छात्राओं का रजिस्ट्रेशन होना है। इतने बड़े पैमाने पर रजिस्ट्रेशन के लिए पर्याप्त समय और स्पष्ट दिशा-निर्देश की आवश्यकता होती है, जो फिलहाल नजर नहीं आ रही।
विभागों के बीच समन्वय की कमी
इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा जगत में यह चर्चा तेज है कि शिक्षा विभाग, झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) और झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) के बीच आपसी समन्वय की भारी कमी है। जबकि स्कूलों की अवकाश तालिका एक वर्ष पहले ही जारी कर दी जाती है और शीतकालीन अवकाश की तिथि पहले से निर्धारित रहती है। ऐसे में उसी अवधि के बीच रजिस्ट्रेशन की तिथि तय करना कई सवाल खड़े करता है।

शिक्षक भी असमंजस में
स्कूलों के शिक्षक भी इस स्थिति को लेकर असमंजस में हैं। वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि शीतकालीन अवकाश के दौरान अपनी छुट्टी पर रहें या फिर स्कूल खोलकर रजिस्ट्रेशन का कार्य करें। अगर अवकाश के दौरान स्कूल खोले भी जाते हैं, तो यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र-छात्राएं ठंड और छुट्टियों के बीच स्कूल पहुंच पाएंगे या नहीं।
वहीं, यदि जैक की ओर से बाद में रजिस्ट्रेशन की तिथि बढ़ाई जाती है, तो उस स्थिति में शिक्षकों का अवकाश भी प्रभावित होगा, जिससे असंतोष बढ़ सकता है।
छात्रों के भविष्य पर असर की आशंका
समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं होने की स्थिति में छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जहां सूचना पहुंचने और ऑनलाइन प्रक्रियाओं में पहले से ही कठिनाइयां रहती हैं।
तत्काल निर्णय की जरूर
शिक्षाविदों और अभिभावकों का मानना है कि इस मामले में शिक्षा विभाग और जैक को जल्द से जल्द स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। या तो रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा बढ़ाई जाए, या फिर शीतकालीन अवकाश के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

मैं अभिमन्यु कुमार पिछले चार वर्षों से गिरिडीह व्यूज में बतौर “चीफ एडिटर” के रूप में कार्यरत हुं,आप मुझे नीचे दिए गए सोशल मीडिया के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।