जेटीईटी परीक्षा आयोजित कराने की मांग को लेकर गिरिडीह में अभ्यर्थियों  ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को सौंपा ज्ञापन…..

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रांची: झारखंड में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटीईटी) पिछले लगभग 9 वर्षों से आयोजित नहीं होने के कारण लाखों अभ्यर्थियों में निराशा बढ़ती जा रही है। इसी को लेकर बी.एड और डी.एल.एड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने नगर विकास एवं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा जल्द आयोजित कराने की मांग की है।

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अभ्यर्थियों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि झारखंड राज्य गठन के लगभग 26 वर्षों में जेटीईटी परीक्षा केवल दो बार—वर्ष 2013 और 20 नवंबर 2016—में ही आयोजित की गई है। इसके बाद से अब तक प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर नहीं मिला है, जिससे हजारों पद खाली पड़े हुए हैं और अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन प्रत्येक वर्ष कम से कम एक बार किया जाना आवश्यक है। वहीं केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) का आयोजन भी प्रतिवर्ष जून और दिसंबर माह में नियमित रूप से किया जाता है, लेकिन झारखंड में लंबे समय से परीक्षा नहीं होने के कारण यहां के अभ्यर्थी लगातार पीछे होते जा रहे हैं।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अगस्त 2024 में सरकार द्वारा जेटीईटी के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें लगभग 35 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। हालांकि सिलेबस में त्रुटि को लेकर हुए विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने अधिसूचना वापस ले ली थी। इसके बाद अप्रैल 2025 में जिलावार भाषा के आधार पर नई नियमावली तैयार की गई, लेकिन विरोध के कारण वह अधिसूचना भी वापस लेनी पड़ी।

अभ्यर्थियों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण पैदल मार्च और धरना-प्रदर्शन भी किया गया था तथा प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जल्द परीक्षा आयोजित कराने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने भी इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया था। साथ ही उच्च न्यायालय द्वारा भी 31 मार्च से पहले परीक्षा आयोजित कराने को लेकर निर्देश दिए जाने की बात कही जा रही है।

अभ्यर्थियों ने मंत्री से अनुरोध किया है कि उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए जेटीईटी की संशोधित नियमावली को जल्द स्वीकृति प्रदान कर परीक्षा आयोजित कराने की दिशा में आवश्यक पहल की जाए

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