स्कॉलरशिप पर ‘फंड पेंच’ खत्म, राज्य सरकार अपने दम पर देगी 400 करोड़ की स्कॉलरशिप, कल्याण मंत्री ने प्रावधान में बदलाव को दी सहमति

Pintu Kumar
3 Min Read
Share This News
WhatsApp Channel Join Now

रांची: झारखंड के पिछड़ा वर्ग (OBC) के करीब 5.5 लाख छात्र-छात्राओं के लिए होली से पहले बड़ी खुशखबरी आई है। हेमंत सोरेन की सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण के नियमों में अहम बदलाव करते हुए साफ कर दिया है कि अब स्कॉलरशिप के लिए केंद्र सरकार के अंशदान का इंतजार नहीं किया जाएगा।

कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने प्रावधानों में शिथिलता देते हुए राज्य के हिस्से की राशि सीधे छात्रों के खातों में भेजने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से राज्य की राजनीति और छात्र संगठनों में हलचल तेज हो गई है।

क्या था ‘फंड का पेंच’?

• अब तक छात्रवृत्ति योजना 60:40 के अनुपात पर संचालित होती थी।

• 60% राशि केंद्र सरकार देती है।

• 40% राशि राज्य सरकार की हिस्सेदारी होती है।

नियम यह था कि जब तक दोनों स्तरों से राशि जारी नहीं होती, तब तक छात्रों को भुगतान नहीं किया जाता।

सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 का लगभग ₹850 करोड़ केंद्रांश लंबित है। वर्ष 2024-25 में राज्य द्वारा मांगे गए ₹253 करोड़ के विरुद्ध केंद्र से मात्र ₹33.57 करोड़ की स्वीकृति मिली। परिणामस्वरूप लाखों छात्रों की छात्रवृत्ति अटक गई थी।

राज्य सरकार का फैसला: ‘अब और इंतजार नहीं

कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा—

> “राज्य सरकार केंद्र की राशि का और इंतजार नहीं करेगी। अपने हिस्से के ₹400 करोड़ सीधे छात्रों के खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजे जाएंगे। इसके लिए वित्त विभाग को फाइल भेज दी गई है।”

इस निर्णय के तहत राज्य सरकार अपने संसाधनों से भुगतान कर छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देना चाहती।

किसे कितना लाभ?

इस निर्णय का लाभ कक्षा 9वीं से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों तक को मिलेगा:

♦ कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्र: ₹100 करोड़ का प्रावधान

पोस्ट मैट्रिक (कॉलेज व उच्च शिक्षा) छात्र: ₹300 करोड़ का आवंटन

♦ कुल लाभार्थी: लगभग 5.5 लाख OBC छात्र

सरकार का लक्ष्य है कि छात्रवृत्ति की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाए।

31 मार्च 2026 तक भुगतान का लक्ष्य

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कल्याण विभाग ने 31 मार्च 2026 तक हर हाल में राशि वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। यदि वित्त विभाग से स्वीकृति शीघ्र मिल जाती है, तो मार्च के दूसरे पखवाड़े से छात्रों को खाते में राशि जमा होने के संदेश मिलने शुरू हो सकते हैं।

राजनीतिक मायने भी अहम

शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यह निर्णय केवल आर्थिक राहत भर नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक संकेत भी स्पष्ट हैं। राज्य सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र पर लंबित राशि को लेकर सवाल उठाए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य सरकार का यह कदम छात्र समुदाय में सकारात्मक संदेश देने के साथ-साथ केंद्र-राज्य संबंधों के नए समीकरण को भी दर्शाता है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page