गिरिडीह जिले के बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में कार्य के दौरान हुए हादसे में 28 वर्षीय मजदूर राजा राम कुशवाहा की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतक के आश्रितों को मुआवजा दिलाया है। जिला उपायुक्त श्री रामनिवास यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रम विभाग और फैक्ट्री प्रबंधन को तत्काल समन्वय स्थापित कर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

प्रशासनिक पहल के परिणामस्वरूप फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा मृतक की आश्रिता पत्नी खुशबू देवी को कुल 17 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया। इसमें 01 लाख रुपये नगद (दाह संस्कार के लिए 50 हजार रुपये एवं 50 हजार रुपये अनुदान राशि) तथा 16 लाख रुपये सीधे बैंक खाते में भेजे गए हैं।

यह मुआवजा कर्मचारी मुआवजा अधिनियम (Workmen’s Compensation Act), 1923 के तहत दिया गया है, जो कार्यस्थल पर दुर्घटना, चोट या मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों और उनके आश्रितों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। अधिनियम के तहत नियोक्ता को ऐसी दुर्घटनाओं में मुआवजा देना अनिवार्य है।
कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 का महत्व
यह अधिनियम भारत में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्य के दौरान दुर्घटना, अपंगता या मृत्यु होने पर श्रमिक या उसके आश्रितों को उचित मुआवजा मिल सके
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अधिनियम की लागूता
यह अधिनियम कारखानों, खदानों, निर्माण कार्य, परिवहन और अन्य जोखिमपूर्ण व्यवसायों में कार्यरत श्रमिकों पर लागू होता है।
अधिनियम की अनुसूची में शामिल श्रेणी के कामगार इसके दायरे में आते हैं।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मैं अभिमन्यु कुमार पिछले चार वर्षों से गिरिडीह व्यूज में बतौर “चीफ एडिटर” के रूप में कार्यरत हुं,आप मुझे नीचे दिए गए सोशल मीडिया के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।