राँची: झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब राज्य के 745 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ‘अबुआ दवाखाना’ स्थापित किए जाएंगे। इस योजना के जरिए ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों के लोगों को एक ही छत के नीचे एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पद्धति की दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से गरीब और ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मरीजों को सस्ती दरों पर या पूरी तरह मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे इलाज का बोझ कम होगा और स्वास्थ्य सेवाएं गांवों तक आसानी से पहुंच सकेंगी।

कोरोना महामारी के बाद से लोगों में आयुष और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति विश्वास बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार लंबे समय से इस योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी कर रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना राज्य के स्वास्थ्य और फार्मा सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है।

एक ही जगह मिलेगा हर बीमारी का इलाज
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ऋषि रिशव ने बताया कि ‘अबुआ दवाखाना’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी एकीकृत चिकित्सा प्रणाली होगी। यहां मरीजों को एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पद्धति की दवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। इससे लोगों को अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार इलाज का विकल्प मिलेगा।
उन्होंने बताया कि इन दवाखानों का संचालन सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों (CHO) और योग प्रशिक्षकों द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक केंद्र को रेफ्रिजरेटर, पावर बैकअप, कंप्यूटर और प्रिंटर जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
नियुक्ति प्रक्रिया भी तेज
डॉ. ऋषि रिशव के अनुसार, योजना को सफल बनाने के लिए कई जिलों में आयुष चिकित्सकों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति पहले ही पूरी की जा चुकी है, जबकि कुछ जिलों में प्रक्रिया जारी है। योजना की निगरानी के लिए प्रखंड और जिला स्तर पर मॉनिटरिंग कमिटी का गठन भी किया जाएगा।
करोड़ों का बजट जारी
सरकार ने इस योजना को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बड़ा बजट निर्धारित किया है।
– प्रत्येक आरोग्य मंदिर के बुनियादी ढांचे के लिए ₹5 लाख दिए जाएंगे।
– योग प्रशिक्षकों को हर महीने ₹3,000 मानदेय मिलेगा।
– इंटरनेट और संचालन खर्च के लिए प्रति वर्ष ₹1 लाख की राशि सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों को दी जाएगी।
– योजना पर एकमुश्त ₹37.25 करोड़ और हर वर्ष ₹7.45 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
ग्रामीणों के लिए बनेगी वरदान
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘अबुआ दवाखाना’ योजना ग्रामीण झारखंड के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। इससे लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, साथ ही वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। सरकार की यह पहल आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है।

मैं अभिमन्यु कुमार पिछले चार वर्षों से गिरिडीह व्यूज में बतौर “चीफ एडिटर” के रूप में कार्यरत हुं,आप मुझे नीचे दिए गए सोशल मीडिया के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।