हार्ट अटैक को गैस समझकर न टालें, ऐसा करना हो सकता है खतरनाक! और जानें, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत नारायण से

giridihviews
11 Min Read
Share This News
WhatsApp Channel Join Now

रांची: झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के 6 सितंबर 2026 को अचानक निधन के बाद कम उम्र में हार्ट अटैक और हृदय संबंधी बीमारियों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 56 वर्षीय सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की वजह हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट बताई गई है। इस घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर हार्ट अटैक इतना जानलेवा क्यों हो रहा है? क्या हार्ट अटैक आने से पहले शरीर कुछ संकेत देता है? क्या सीने में होने वाली जलन को गैस समझना भारी पड़ सकता है? युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ रहा है और नियमित हार्ट चेकअप आखिर कब से शुरू करना चाहिए?

इन्हीं सवालों को लेकर एक निजी चैनल के पत्रकार ने रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख और प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत नारायण से बातचीत की। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति बाहर से पूरी तरह स्वस्थ और फिट दिखाई दे, इसके बावजूद उसके शरीर में हृदय रोग के कई जोखिम कारक मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच बेहद जरूरी है।

काम के लिए समय है, लेकिन हेल्थ चेकअप के लिए नहीं

डॉ. हेमंत नारायण के मुताबिक आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग अपने स्वास्थ्य की नियमित जांच को प्राथमिकता नहीं देते। उन्होंने कहा कि डॉक्टर हों, राजनेता हों, ब्यूरोक्रेट्स हों या आम लोग—व्यस्त जीवनशैली के बीच लोग अपने काम के लिए समय निकाल लेते हैं, लेकिन हेल्थ चेकअप को लगातार टालते रहते हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच के जरिए ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और किडनी फंक्शन जैसी महत्वपूर्ण चीजों का पता लगाया जा सकता है। कई बार व्यक्ति को यह जानकारी ही नहीं होती कि उसका ब्लड शुगर काफी बढ़ चुका है या ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।

डॉ. नारायण का कहना है कि यदि इन जोखिम कारकों की पहचान समय रहते हो जाए तो खान-पान में सुधार, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर दवाओं के जरिए इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।

15 साल की उम्र से कोलेस्ट्रॉल की जांच की सलाह

हार्ट डिजीज को केवल बुजुर्गों की बीमारी समझना सही नहीं है। डॉ. हेमंत नारायण ने अमेरिकन हेल्थ गाइडलाइंस का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों और किशोरों में भी कोलेस्ट्रॉल की जांच की जा सकती है और लगभग 15 वर्ष की उम्र तक इसकी जांच शुरू हो जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि डायबिटीज अब केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। आज 20-25 वर्ष की उम्र में भी टाइप-2 डायबिटीज के मामले देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में कम उम्र से ही ब्लड शुगर, वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे स्वास्थ्य मानकों पर ध्यान देना जरूरी है।

युवाओं में हार्ट अटैक का बड़ा जोखिम है स्मोकिंग

कम उम्र में हार्ट अटैक के कारणों पर बात करते हुए डॉ. हेमंत नारायण ने स्मोकिंग को बड़ा जोखिम कारक बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं में धूम्रपान की शुरुआत जितनी जल्दी होती है, उतना ही लंबे समय तक शरीर इसके नुकसान के संपर्क में रहता है।

उन्होंने रांची में सामने आए एक मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि एक युवक ने 17 वर्ष की उम्र में स्मोकिंग शुरू की थी और करीब 20 वर्ष की उम्र में उसे मैसिव हार्ट अटैक हो गया।

डॉक्टर का स्पष्ट संदेश है कि स्मोकिंग शुरू ही नहीं करनी चाहिए और जो लोग धूम्रपान करते हैं, उन्हें इसे छोड़ने की कोशिश करनी चाहिए।

परिवार में हार्ट अटैक का इतिहास है तो 35 की उम्र से जांच जरूरी

हार्ट डिजीज के जोखिम में पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. हेमंत नारायण के अनुसार अगर किसी करीबी पुरुष रिश्तेदार को 55 वर्ष से कम उम्र में या महिला रिश्तेदार को 65 वर्ष से कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ है, तो परिवार के अन्य सदस्यों में भी आनुवंशिक जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।

ऐसे लोगों को सामान्य आबादी की तुलना में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। डॉक्टर ने ऐसे मामलों में करीब 35 वर्ष की उम्र से नियमित हार्ट चेकअप शुरू करने की सलाह दी है।

हार्ट अटैक अचानक नहीं आता, शरीर दे सकता है चेतावनी

हार्ट अटैक को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि यह हमेशा बिना किसी चेतावनी के अचानक आता है। डॉ. हेमंत नारायण के मुताबिक कई मरीजों में हार्ट अटैक से पहले शरीर कुछ संकेत दे सकता है।

खासकर यदि ये लक्षण चलने, सीढ़ियां चढ़ने या किसी अन्य शारीरिक गतिविधि के दौरान दिखाई दें तो इन्हें सामान्य थकान या गैस मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इन संकेतों पर रहें सावधान

  • चलने-फिरने पर सांस फूलना
  • पहले की तुलना में जल्दी और ज्यादा थकान महसूस होना
  • शारीरिक गतिविधि के दौरान सीने में जलन
  • सीने में भारीपन, दबाव या असहजता
  • चलते समय असामान्य डकार या बेचैनी
  • बाएं या दाएं हाथ में भारीपन
  • दोनों हाथों में असहजता
  • ठुड्डी में दर्द या भारीपन
  • पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, जलन या भारीपन

इनमें से कोई लक्षण बार-बार हो रहा है या मेहनत के दौरान सामने आ रहा है तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

पहला ECG सामान्य आए तो भी हार्ट अटैक को पूरी तरह खारिज न करें

डॉ. हेमंत नारायण ने डॉक्टरों और मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि अगर किसी मरीज में हार्ट अटैक जैसे लक्षण मौजूद हैं, लेकिन पहली ECG रिपोर्ट सामान्य आती है, तो केवल उसी रिपोर्ट के आधार पर हार्ट की समस्या को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।

लक्षणों के आधार पर जरूरत पड़ने पर दोबारा ECG, सीरियल ECG और अन्य आवश्यक जांच की जा सकती है। यानी सामान्य शुरुआती ECG हमेशा यह साबित नहीं करता कि मरीज को हृदय संबंधी कोई समस्या नहीं है।

सीने की जलन को हर बार गैस समझना पड़ सकता है भारी

सीने में जलन या दर्द होने पर बड़ी संख्या में लोग इसे गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। डॉक्टर के मुताबिक कुछ मामलों में यह वास्तव में गैस की वजह से हो सकता है, लेकिन हर मरीज में ऐसा मान लेना खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई 20 वर्ष का व्यक्ति है, वह स्मोकिंग नहीं करता और उसके पास हार्ट डिजीज के प्रमुख जोखिम कारक भी नहीं हैं, तो सीने में जलन की वजह गैस होने की संभावना हो सकती है।

लेकिन 40 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति, डायबिटीज के मरीज, स्मोकर या परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रखने वाले व्यक्ति में सीने की जलन को सिर्फ गैस मानकर छोड़ना उचित नहीं है।

ऐसे मामलों में ECG और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य जांच जरूरी हो सकती है। आखिर सीने की तकलीफ गैस की वजह से है या हार्ट से जुड़ी है, इसका फैसला चिकित्सकीय जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।

क्या कोविड वैक्सीन से बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक?

युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों के बीच कोविड और कोविड वैक्सीन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इस सवाल पर डॉ. हेमंत नारायण ने कहा कि फिलहाल यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कोविड या कोविड वैक्सीन की वजह से युवाओं में हार्ट अटैक बढ़ गए हैं।

उनके मुताबिक ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं। इसलिए किसी व्यक्ति की मौत के बाद बिना पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण के कोविड वैक्सीन को सीधे इसका कारण बताना उचित नहीं है।

हार्ट अटैक के जोखिम को सिर्फ उम्र से जोड़ना गलत

डॉ. हेमंत नारायण के मुताबिक हार्ट अटैक का खतरा केवल उम्र बढ़ने के साथ ही नहीं जुड़ा है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग, खराब जीवनशैली और पारिवारिक इतिहास जैसे कई जोखिम कारक हृदय रोग की संभावना बढ़ा सकते हैं।

इसलिए युवा उम्र में भी इन चीजों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

डॉक्टर की सलाह: लक्षणों को पहचानें, जांच को न टालें

डॉ. हेमंत नारायण की सलाह है कि लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच के जरिए कई जोखिम कारकों का पता समय रहते लगाया जा सकता है।

खासकर जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग की आदत या परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास है, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सीने में दर्द, दबाव या जलन को हर बार गैस मानकर घर पर इंतजार न करें। खासकर जोखिम वाले व्यक्ति में ऐसी तकलीफ होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

हार्ट अटैक के मामले में ‘थोड़ा इंतजार कर लेते हैं’ वाली सोच जानलेवा साबित हो सकती है। समय पर अस्पताल पहुंचना और उचित जांच एवं इलाज शुरू होना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page