22 कैरेट बता दुकानदार ने 16 कैरेट का सोना बेचा, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया बड़ा फैसला, अब चुकाने होंगे लाखों रुपये..

भरोसे के नाम पर ठगी, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया इंसाफ का फैसला....

Himanshu Kumar Deo
4 Min Read
Highlights
  • 22 कैरेट बताकर 16 कैरेट का सोना बेचा गया।
  • दुकानदार को लाखों रुपये जुर्माना भरने का आदेश मिला।
  • आयोग ने मानसिक पीड़ा और मुकदमे की लागत का भी मुआवजा तय किया।
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Patna: बिहार की राजधानी पटना जिला उपभोक्ता आयोग 22 कैरेट सोने के नाम पर ठगी का आरोप लगाया। जांच में आभूषण की शुद्धता काफी कम पाई गई। आयोग ने दुकानदार पर लाखों रुपये जुर्माना ठोका और 22 कैरेट का आभूषण लौटाने या उसकी पूरी कीमत चुकाने का आदेश दिया। यह मामला शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता शिकायत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 12 के अंतर्गत श्री शिव ज्वेलर्स पर दोषपूर्ण वस्तुओं की बिक्री एवं अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए दर्ज कराया था।

क्या है मामला?

यारपुर के निवासी प्रणेश कुमार सिंह ने न्यू मार्केट स्थित श्री शिव ज्वेलर्स से 18 जून 2011 को शादी के लिए सोने के आभूषण खरीदे। उन्होंने हार, अंगूठी, झुमका, नथ, टीका और चूड़ियां खरीदने में कुल 1.64 लाख रुपये खर्च किए। दुकानदार ने आभूषण को 22 कैरेट का बताया और उसके मुताबिक पैसे का भुगतान कराया।

शुद्धता जांच में हुआ खुलासा

बाद में जब वादी ने आभूषण की शुद्धता की जांच कराई तो पता चला कि हार और पेंडेंट में केवल 65% (15.6 कैरेट) और 68.44% (16.43 कैरेट) सोना है। जांच रिपोर्ट GN हॉलमार्किंग, कोलकाता शाखा (पटना) से प्रमाणित थी।

वादी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रतिवादी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया।

जवाब में क्या बोले दुकानदार?

अपने बचाव में श्री शिव ज्वेलर्स ने आपत्ति दी कि खरीद की रसीद प्रणेश कुमार सिंह के नाम पर नहीं है। रसीद में उन्होंने प्रीतम लिखाया है। शिकायतकर्ता ने जो रसीद संलग्न की है, वह उनके नाम पर नहीं है। इसलिए, यह साबित नहीं हुआ कि आभूषण 22 कैरेट नहीं थे।

जबकि, शिकायतकर्ता ने स्वयं उपस्थित होकर कहा कि उनका उपनाम ‘प्रीतम उर्फ प्रीतम कुमार सिंह’ है, और प्रणेश कुमार सिंह वही व्यक्ति हैं। इसे साबित करने के लिए उन्होंने विवाह का निमंत्रण पत्र और मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन प्रस्तुत किया जिसमें दोनों नामों का उल्लेख है।

न ही बिल, न ही भरोसेमंद जवाब

प्रतिवादी केवल एक अनुमानित बिल दे सके। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि उनका कोई हॉलमार्किंग प्रमाण है। जिसके कारण आयोग ने कहा कि दुकानदार राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने में असफल रहे हैं।

आयोग ने फैसला में क्या सुनाया?

दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने फैसला सुनाते हुए कहा कि शिकायतकर्ता यदि आभूषण लौटाते हैं तो उन्हें 22 कैरेट BIS हॉलमार्क वाला आभूषण वापस करना होगा। अन्यथा, मौजूदा बाजार दर पर मूल्य + 20% मेकिंग चार्ज + 15% वार्षिक ब्याज के साथ 60 दिनों में रकम चुकाई जाए। इसके साथ ही, मानसिक पीड़ा के लिए एक लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। मुकदमे की लागत ₹20,000 और उपभोक्ता कल्याण कोष में ₹3 लाख जुर्माना जमा करने का आदेश दिया।

इस फैसले से क्या सबक?

यह मामला सभी उपभोक्ताओं के लिए सबक है। सोना या अन्य महंगे सामान खरीदते समय केवल दावे पर भरोसा न करें। हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें। वहीं, जब आप किसी धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं तो उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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