रांची: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित सहायक अध्यापक (पारा शिक्षक) आकलन परीक्षा का परिणाम गुरुवार को औपचारिक रूप से घोषित कर दिया गया। इस परीक्षा का आयोजन विशेष रूप से उन पारा शिक्षकों के लिए किया गया था, जो झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में सफल नहीं हो पाए थे।
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इस परीक्षा में शिक्षकों की योग्यता और शैक्षणिक दक्षता को परखने के उद्देश्य से दो अलग-अलग वर्गों में मूल्यांकन किया गया—कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 तक। परीक्षा परिणामों से यह स्पष्ट हुआ है कि अभी भी एक बड़ी संख्या में पारा शिक्षकों को शिक्षण कार्य के लिए आवश्यक मूलभूत दक्षताओं पर काम करने की जरूरत है।
कम रही सफलता दर
परीक्षा में कक्षा 1 से 5 के लिए कुल 9677 शिक्षकों ने आवेदन किया था, जिनमें से 9449 शिक्षक परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से सिर्फ 4910 ही सफल हो सके। यानी इस वर्ग की सफलता दर महज 51.96% रही। यह आंकड़ा पारा शिक्षकों की वर्तमान शैक्षणिक तैयारी और प्रशिक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
कक्षा 6 से 8 में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन
दूसरी ओर, कक्षा 6 से 8 के लिए कुल 1313 आवेदन प्राप्त हुए थे और इनमें से 1270 शिक्षक परीक्षा में सम्मिलित हुए। इस वर्ग में 814 शिक्षक सफल घोषित किए गए, जिससे इस वर्ग की सफलता दर 64.09% रही। यह परिणाम प्राथमिक वर्ग की तुलना में बेहतर है और माध्यमिक शिक्षा स्तर के पारा शिक्षकों की तैयारी को अधिक सशक्त दर्शाता है।
सफल अभ्यर्थियों को मिलेगा प्रोत्साहन
सरकार द्वारा तय प्रावधान के अनुसार, जो शिक्षक इस आकलन परीक्षा में सफल हुए हैं, उन्हें उनके वर्तमान मानदेय में 10% की वृद्धि प्रदान की जाएगी। यह प्रोत्साहन उन शिक्षकों के लिए एक सकारात्मक संदेश है, जो नियमित रूप से शिक्षण कार्य में लगे हुए हैं और अपने ज्ञान को अद्यतन रखने का प्रयास कर रहे हैं।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ परिणाम घोषित
परीक्षा परिणाम की घोषणा जेएसी के अध्यक्ष डॉ. नटवा हंसदा द्वारा की गई। इस अवसर पर परिषद के सचिव जयंत मिश्रा, आईटी अफसर कुणाल कुमार समेत अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। परिषद द्वारा सभी सफल शिक्षकों को शुभकामनाएं दी गईं और असफल हुए अभ्यर्थियों को अगले प्रयास में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया।
JTET फेल शिक्षकों के लिए विशेष अवसर
गौरतलब है कि झारखंड सरकार द्वारा यह आकलन परीक्षा विशेष रूप से JTET में असफल रहे पारा शिक्षकों के लिए प्रारंभ की गई थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षकों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और राज्य के बच्चों को योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षक ही मिलें।