हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिनमें दो गुप्त नवरात्रि होती हैं और दो प्रमुख रूप से चैत्र तथा शारदीय नवरात्रि के नाम से जानी जाती हैं। इनमें शारदीय नवरात्रि का अपना अलग स्थान है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर भक्त सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।
शारदीय नवरात्रि कब से होगी शुरू?
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025, सोमवार से होगी। नवरात्रि का प्रारंभ कलश स्थापना के साथ होता है। कलश स्थापना को नवरात्रि के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
2025 में घटस्थापना 22 सितंबर को ही की जाएगी।
• शुभ मुहूर्त: सुबह 06:09 बजे से 08:06 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 56 मिनट)
• अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:49 बजे से 12:38 बजे तक (अवधि: 49 मिनट)
• शारदीय नवरात्रि 2025 का विस्तृत कैलेंडर
• 22 सितंबर – प्रतिपदा: शैलपुत्री पूजा
• 23 सितंबर – द्वितीया: ब्रह्मचारिणी पूजा
• 24 सितंबर – तृतीया: चंद्रघंटा पूजा
• 26 सितंबर – चतुर्थी: कूष्मांडा पूजा
• 27 सितंबर – पंचमी: स्कंदमाता पूजा
• 28 सितंबर – महाषष्ठी: कात्यायनी पूजा, दुर्गा पूजा की शुरुआत
• 29 सितंबर – महासप्तमी: कालरात्रि पूजा
• 30 सितंबर – महाअष्टमी: महागौरी पूजा
• 1 अक्टूबर – महानवमी: सिद्धिदात्री पूजा
• 2 अक्टूबर – विजयादशमी: रावण दहन और विजय उत्सव
दुर्गा पूजा का पर्व
शारदीय नवरात्रि का मुख्य आकर्षण दुर्गा पूजा है, जो महाषष्ठी से प्रारंभ होती है। इस बार महाषष्ठी 28 सितंबर को पड़ेगी। इसके बाद पाँच दिनों तक महोत्सव मनाया जाएगा—महाषष्ठी, महासप्तमी, महाअष्टमी, महानवमी और अंत में 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ इसका समापन होगा।
मां दुर्गा की सवारी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर नवरात्रि में देवी दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर अपने भक्तों के घर पधारेंगी। हाथी की सवारी को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। यह समृद्धि, उन्नति और शांति का प्रतीक है।
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि के नौ दिनों में साधना, उपवास और पूजा के माध्यम से भक्त अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। माना जाता है कि इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
अस्वीकरण: प्रस्तुत जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांग और पारंपरिक ग्रंथों पर आधारित है। दी गई सामग्री की पूर्णता, सटीकता या प्रामाणिकता की गारंटी नहीं दी जाती। पाठकों से अनुरोध है कि इसे अंतिम सत्य न मानें, बल्कि आवश्यक होने पर विशेषज्ञ या अधिकृत स्रोत से पुष्टि करें।