झारखंड में पेयजल व्यवस्था सुधारने की तैयारी, 7,890 नए चापाकल लगेंगे और 13 हजार जलमित्रों का होगा चयन….

झारखंड पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत, 7,890 नए चापाकल और 13 हजार जलमित्रों के चयन की तैयारी।

Abhimanyu Kumar
4 Min Read
झारखंड में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी, 7,890 नए चापाकल लगाने और 13 हजार से अधिक जलमित्रों के चयन की योजना।
Share This News
WhatsApp Channel Join Now

रांची। झारखंड में ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल समस्या दूर करने और जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने दो महत्वपूर्ण पहल की हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य के सभी 263 प्रखंडों में 7,890 नए चापाकल लगाए जाएंगे। वहीं, जल जीवन मिशन 2.0 के तहत पंचायतों में 13 हजार से अधिक नल-जल मित्रों के चयन को भी मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं से ग्रामीणों को पेयजल की सुविधा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

96.54 करोड़ रुपये से लगेंगे नए चापाकल

राज्य के सभी 263 प्रखंडों में 30-30 नए चापाकल लगाने की योजना है। इसके लिए सरकार ने 96 करोड़ 54 लाख 70 हजार 810 रुपये की मंजूरी दी है। गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत झेलने वाले गांवों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन इलाकों में नए चापाकल उपयोगी साबित हो सकते हैं, जहां नल से नियमित जलापूर्ति नहीं हो पाती है।

राज्य में 92 हजार से अधिक चापाकल खराब

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में कुल 3,12,971 चापाकल हैं। इनमें से 2,19,915 चालू हैं, जबकि 92,950 खराब पड़े हैं। ऐसे में नए चापाकल लगाने के साथ पुराने चापाकलों की मरम्मत करना भी जरूरी है, ताकि ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान नहीं होना पड़े।

पंचायतों में चुने जाएंगे 13 हजार से अधिक जलमित्र

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राज्य की लगभग 4,345 पंचायतों में तीन-तीन नल-जल मित्रों का चयन किया जाएगा। मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई एपेक्स कमेटी की बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

जलमित्रों का मुख्य काम पाइप जलापूर्ति योजनाओं का रखरखाव करना और छोटी-मोटी तकनीकी खराबियों को ठीक करना होगा। इससे गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी।

प्रशिक्षण के बाद मिलेगा काम का अवसर

योजना के तहत नए अभ्यर्थियों को 510 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि अनुभवी लोगों के लिए 120 घंटे का कौशल उन्नयन प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के लिए बीआईटी मेसरा, आईएसएम धनबाद और निर्मला कॉलेज, रांची जैसे संस्थानों के साथ समझौता करने की योजना है।

 

जलमित्रों के मानदेय और प्रशिक्षण के लिए 16वें वित्त आयोग के टाइड ग्रांट का उपयोग किया जाएगा। योजना में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, पूर्व सैनिकों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को अवसर देने पर जोर दिया गया है।

नल से पानी नहीं मिलने वाले परिवारों को मिलेगी राहत

जल जीवन मिशन के तहत झारखंड के 62.51 लाख घरों में से 34.97 लाख घरों तक नल से पानी पहुंचने की जानकारी दी गई है। ऐसे में बड़ी संख्या में परिवार अब भी पेयजल के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हैं।

सरकार की दोनों पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना और जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव को बेहतर बनाना है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ नए चापाकलों की स्थापना, खराब चापाकलों की मरम्मत और जलमित्रों के चयन एवं प्रशिक्षण के समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगा।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *