किसान परिवार से सेना में कर्नल तक का सफर: 17 साल की उम्र में वायुसेना में भर्ती हुए अनिल यादव, 36 साल 8 माह की गौरवशाली सेवा के बाद हुए सेवानिवृत्त…

किसान के बेटे ने 17 साल की उम्र में पहनी वर्दी, 36 साल 8 माह देशसेवा के बाद कर्नल अनिल यादव सेवानिवृत्त

Abhimanyu Kumar
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Highlights
  • किसान के बेटे ने 17 साल की उम्र में पहनी वर्दी, 36 साल 8 माह देशसेवा के बाद कर्नल अनिल यादव सेवानिवृत्त
  • किसान के बेटे ने 17 साल की उम्र में पहनी वर्दी, 36 साल 8 माह देशसेवा के बाद कर्नल अनिल यादव सेवानिवृत्त
  • CDS परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय थल सेना में अधिकारी बनने का सपना किया साकार।
  • मात्र 17 वर्ष 4 माह की उम्र में भारतीय वायुसेना में रेडियो टेक्नीशियन के रूप में हुए थे भर्ती।
  • 274 मीडियम रेजिमेंट की कमान संभालने का मिला गौरव। एनसीसी कैडेटों की 1,300 किलोमीटर लंबी रांची-दिल्ली साइकिल रैली का किया नेतृत्व।
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झज्जर जिले के गांव तुम्बाहेड़ी निवासी कर्नल अनिल यादव 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायु सेना एवं भारतीय थल सेना में कुल 36 वर्ष 8 माह की गौरवशाली सैन्य सेवा पूर्ण करने के उपरांत सेवानिवृत्त हुए। उनका सैन्य जीवन संघर्ष, दृढ़ संकल्प, अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल है।

कर्नल अनिल यादव …..

कर्नल अनिल यादव का जन्म स्वर्गीय धीर सिंह यादव एवं लाल कौर यादव के किसान परिवार में हुआ। उन्होंने कक्षा आठवीं तक की शिक्षा राजकीय उच्च विद्यालय, तुम्बाहेड़ी से प्राप्त की। 1986 में कक्षा आठवीं में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर उन्हें कक्षा नौवीं एवं दसवीं के लिए प्रतिमाह 100 रुपये की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इसके पश्चात उन्होंने शंभू दयाल मॉडर्न स्कूल, सोनीपत में प्रवेश लिया, जहां उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बचपन से ही सशस्त्र सेनाओं में शामिल होकर देशसेवा करना उनका सपना था।

कक्षा ग्यारहवीं उत्तीर्ण करने के बाद मात्र 17 वर्ष 4 माह की आयु में उन्होंने 22 फरवरी 1990 को भारतीय वायु सेना में रेडियो टेक्नीशियन के रूप में प्रवेश किया। बेंगलुरु स्थित कम्युनिकेशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में रेडियो टेक-159 कोर्स के अपने साथियों के साथ 16 माह का कठोर प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उनकी तैनाती मेंटेनेंस कमांड (यूनिट), नागपुर तथा तत्पश्चात RAME, वडसर (गुजरात) में हुई।

माँ के साथ मंदिर में पूजा करते कर्नेल अनिल यादव..

भारतीय वायु सेना में सेवा के दौरान उन्हें कक्षा बारहवीं उत्तीर्ण करने तथा बाह्य विद्यार्थी के रूप में कला स्नातक (BA) की डिग्री प्राप्त करने का अवसर मिला। अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करते हुए उन्होंने संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा उत्तीर्ण की और भारतीय थल सेना में अधिकारी बनने का मार्ग प्रशस्त किया। वायु सेना में 7 वर्ष, 8 माह एवं 9 दिनों की सेवा के पश्चात 31 अक्टूबर 1997 को उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई में रिपोर्ट किया। SS-66 एवं WS-12 कोर्स के अपने साथियों के साथ प्रशिक्षण के दौरान बना भाईचारा और सौहार्द आज भी उनके लिए अमूल्य धरोहर है।

    निकट संबंधियों के साथ हनुमान जी के दर्शन करते कर्नेल यादव

भारतीय थल सेना में कमीशन प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने विभिन्न आर्टिलरी रेजिमेंट्स में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उन्हें 274 मीडियम रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त करने और अपने सैन्य जीवन के दौरान उसी रेजिमेंट की कमान संभालने का गौरव प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त उन्होंने 311 फील्ड रेजिमेंट, 852 लाइट रेजिमेंट एवं 43 मीडियम रेजिमेंट में भी सेवाएं दीं। एनसीसी में उनके अंतिम तीन कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे, जहां उन्हें युवाओं से जुड़ने, उनका मार्गदर्शन करने तथा उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करने का अवसर मिला।

 

कर्नल अनिल यादव स्वयं एक बहुआयामी व्यक्तित्व एवं खेलप्रेमी हैं। वे नियमित रूप से बैडमिंटन खेलते हैं तथा देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित अनेक मैराथन दौड़ों में भाग ले चुके हैं। इसके अतिरिक्त, वे एक उत्साही बाइक राइडर एवं साइकिलिस्ट भी हैं। खेल एवं फिटनेस के प्रति उनका समर्पण कैडेटों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उनका दृढ़ विश्वास है कि स्वस्थ शरीर, दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच ही एक सफल एवं आत्मविश्वासी व्यक्तित्व की आधारशिला हैं।

 

दिसंबर 2025 में उन्होंने एनसीसी कैडेटों की एक ऐतिहासिक साइकिल रैली का नेतृत्व किया, जो रांची से नई दिल्ली तक आयोजित की गई थी। इस राष्ट्रीय स्तर की पहल को झारखंड के तत्कालीन माननीय राज्यपाल श्री संतोष गंगवार तथा माननीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने रांची से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लगभग 1,300 किलोमीटर की इस यात्रा ने कैडेटों में साहस, अनुशासन, टीम भावना, धैर्य एवं राष्ट्रीय एकता का अद्भुत संदेश प्रसारित किया। दिल्ली पहुंचने पर इस साइकिल रैली को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री की रैली के दौरान हरी झंडी दिखाकर स्वागत एवं सम्मान प्रदान किया। यह उपलब्धि न केवल झारखंड एनसीसी के लिए गौरव का विषय रही, बल्कि संथाल परगना की बालिका कैडेटों सहित पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनी।

 

भारतीय वायु सेना में सेवाकाल के दौरान उत्कृष्ट कार्य एवं समर्पित सेवाओं के लिए उन्हें एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, मेंटेनेंस कमांड, नागपुर द्वारा प्रशंसा पत्र (Commendation) से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार, भारतीय थल सेना में सेवाकाल के दौरान उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, आर्मी ट्रेनिंग कमांड, शिमला द्वारा भी उन्हें प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कर्नल यादव अपनी उपलब्धियों का श्रेय उन वीर सैनिकों को देते हैं, जिनके साथ उन्हें सेवा करने का अवसर मिला। उनके अनुसार किसी भी सैन्य अधिकारी की रैंक को वास्तविक गरिमा उसके अधीन कार्य करने वाले सैनिकों के साहस, निष्ठा, व्यावसायिक दक्षता, कठिन परिश्रम और समर्पण से प्राप्त होती है।

दोनों सुपुत्रियों के साथ ख़ुशी की पल…

झज्जर पहुंचने पर उन्होंने भारतीय सेना के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने 6 ग्रेनेडियर्स के लेफ्टिनेंट रविंद्र छिक्कारा, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत), को पुष्पचक्र अर्पित किया, जिन्होंने 19 जुलाई 2000 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में राष्ट्र की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने 21 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के मेजर अमित देशवाल, सेना मेडल (मरणोपरांत), को भी श्रद्धांजलि दी, जो 13 अप्रैल 2016 को मणिपुर के तामेंगलॉन्ग जिले में एक सैन्य अभियान के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इसके अतिरिक्त उन्होंने झज्जर जिले एवं हरियाणा के उन सभी वीर सैनिकों को नमन किया, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने सभी हरियाणा वासियों को हरियाणा दिवस पर भी शुभकामनाएँ दीं ।

अपने पैतृक गांव तुम्बाहेड़ी पहुंचने पर ग्रामीणों एवं क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा उनका भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर उन्होंने 13 कुमाऊं के स्वर्गीय सिपाही प्यारे लाल यादव के स्मारक पर माला अर्पित अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सिपाही प्यारे लाल यादव 18 नवम्बर 1962 को विश्व के सबसे भीषण युद्धों में से एक रेजांग ला की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए थे। उन्होंने गाँव के हनुमान जी और बाबा बालक पुरी जी के मंदिरों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया ।

 

कर्नल यादव ने अपनी इस यात्रा के लिए ईश्वर के आशीर्वाद, शिक्षकों के मार्गदर्शन, माता-पिता एवं भाई-बहनों के त्याग तथा अपने सहपाठियों के प्रोत्साहन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी स्वर्गीय पत्नी राजवंती को विशेष रूप से याद किया, जो जीवनभर उनकी शक्ति और संबल बनी रहीं। उनकी बेटियां अन्नू एवं अनुष्का भी उनके जीवन की प्रेरणा और शक्ति का प्रमुख आधार रही हैं।

 

कर्नल अनिल यादव की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि साधारण एवं विनम्र शुरुआत कभी भी ऊंचे सपने देखने की राह में बाधा नहीं बनती। दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और अटूट विश्वास से सपनों को साकार किया जा सकता है।

 

दो महान सेनाओं में सेवा करने और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के गौरव के साथ उन्होंने 36 वर्ष 8 माह की सैन्य सेवा को पूर्ण किया। उनका जीवन युवाओं, विशेषकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

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