गिरिडीह के डॉ. सुरेश वर्मा ने देशभर में बढ़ाया झारखंड का मान, प्रशासन, साहित्य और समाजसेवा में बनाई विशिष्ट पहचान….

प्रशासन, शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान से राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले गिरिडीह के गौरव डॉ. सुरेश वर्मा।

Abhimanyu Kumar
5 Min Read
Highlights
  • साहित्य, मानवाधिकार और शिक्षा के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त।
  • UPSC चयन के बाद भी PhD और IIM रांची से विशेष प्रशिक्षण पूरा किया।
  • समाजसेवा के लिए ‘सनातन श्री सहायता’ मिशन का संचालन।
  • पश्चिम बंगाल चुनाव में 13 हजार सुरक्षा बलों के समन्वय की जिम्मेदारी निभाई।
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गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले के शिक्षाविद् स्व. दिनेश्वर वर्मा के सुपुत्र डॉ. सुरेश वर्मा आज प्रशासन, शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अपनी बहुमुखी प्रतिभा के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। अपनी प्रशासनिक दक्षता, सामाजिक सरोकारों और अकादमिक उपलब्धियों के दम पर उन्होंने न केवल गिरिडीह बल्कि पूरे झारखंड का नाम देशभर में रोशन किया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान डॉ. सुरेश वर्मा को सब-नोडल ऑफिसर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस दौरान उन्होंने 13 हजार से अधिक सुरक्षा बलों के समन्वय और संचालन का नेतृत्व करते हुए चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए विभागीय स्तर पर कई प्रशंसा पत्र और सम्मान प्रदान किए गए।

सामाजिक सेवा में भी अग्रणी

डॉ. वर्मा प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके द्वारा शुरू किए गए ‘सनातन श्री सहायता’ मिशन के माध्यम से दिल्ली के विभिन्न राहत शिविरों में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी परिवारों को भोजन, वस्त्र, चिकित्सा और शिक्षा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल को मानवीय सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

UPSC से PhD तक का प्रेरणादायक सफर

दिल्ली विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले डॉ. सुरेश वर्मा ने UGC-NET परीक्षा उत्तीर्ण की और कैंपस लॉ सेंटर में कानून की पढ़ाई शुरू की। वर परीक्षा में सफलता मिलने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा का मार्ग चुना। व्यस्त सरकारी सेवा के बावजूद उन्होंने शोध कार्य जारी रखते हुए PhD की उपाधि प्राप्त की। इसके अलावा उन्होंने IIM रांची से लीडरशिप एंड पब्लिक पॉलिसी का विशेष प्रशिक्षण भी हासिल किया।

कई भाषाओं के जानकार

डॉ. सुरेश वर्मा अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, उर्दू, बंगाली, उड़िया, नेपाली, पंजाबी, मराठी, गुजराती, भोजपुरी, मैथिली, मगही सहित अनेक भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का ज्ञान रखते हैं। उनकी बहुभाषी क्षमता उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाती है।

छात्र आंदोलनों में निभाई सक्रिय भूमिका

छात्र जीवन के दौरान वे निर्भया आंदोलन, इंडिया अगेंस्ट करप्शन अभियान तथा CSAT आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण जन आंदोलनों से जुड़े रहे। सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर युवाओं की आवाज़ बुलंद करने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

साहित्य जगत में ‘प्रियदर्शी’ के नाम से प्रसिद्ध

प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ डॉ. सुरेश वर्मा एक साहित्यकार और कवि भी हैं। साहित्यिक जगत में वे ‘प्रियदर्शी’ नाम से जाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, प्रकृति, मानवता और सामाजिक चेतना के विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उनकी चर्चित पुस्तकों में ‘पतझड़’, ‘श्रीराम’ और ‘ग्लोबल साहित्य मंजरी’ शामिल हैं।

कई प्रतिष्ठित सम्मानों से हुए सम्मानित

मानवाधिकार, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. वर्मा को भारत सेवा रत्न, ग्लोबल साहित्य अवार्ड, डॉ. भीमराव अंबेडकर कीर्ति अवार्ड, कबीर सम्मान और अटल बिहारी वाजपेयी मानवाधिकार पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 2023 में उन्हें नई दिल्ली में इंडिया प्राइड अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।

खोरठा भाषा और संस्कृति के संरक्षण में जुटे

डॉ. वर्मा क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी लगातार कार्य कर रहे हैं। नवंबर 2026 में प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय खोरठा महोत्सव के आयोजन की तैयारियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। इससे पहले वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का सफल नेतृत्व कर चुके हैं।

शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर प्रयास

डॉ. सुरेश वर्मा वर्तमान में ‘एम्परर ऑफ एम्परर्स चंद्रगुप्त मौर्य इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी’ और ‘ग्लोबल बुद्ध यूनिवर्सिटी’ जैसी महत्वाकांक्षी शैक्षणिक पहलों से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा वे ‘कलम का सिपाही’ और ‘मिशन एलीवेट इंडिया’ जैसे अभियानों के माध्यम से वंचित वर्गों के उत्थान और युवाओं को मार्गदर्शन देने का कार्य कर रहे हैं।

दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में पर्वतारोहण, सामाजिक सेवा, प्रशासनिक नेतृत्व और साहित्यिक योगदान के कारण डॉ. सुरेश वर्मा आज देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरे हैं।

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