21 लीटर जल लेकर 400 किमी की पदयात्रा पर निकलीं कुसुम साहू, गौरक्षा का संदेश देते हुए पहुंचीं जमुआ…

देवघर में बाबा बैद्यनाथ का करेंगी जलाभिषेक, यात्रा के पांचवें दिन जमुआ में शिवभक्तों ने किया भव्य स्वागत

Abhimanyu Kumar
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सावन माह में भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और गौरक्षा के संकल्प के साथ झारखंड के कोडरमा जिले की कुसुम साहू अपनी माता सरिता देवी एवं साथी लीलावती कुमारी के साथ 21 लीटर जल लेकर लगभग 400 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा पर निकली हैं।

यात्रा के पांचवें दिन रविवार को जब वे गिरिडीह जिले के जमुआ पहुंचीं तो स्थानीय शिवभक्तों, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत कर हौसला बढ़ाया। इसके बाद सभी लोगों ने मिलकर गाजे बाजे के साथ उन्हें लंगटा बाबा मंदिर पहुंचाया, जहां रात्रि विश्राम करने के बाद आगे देवघर के लिए प्रस्थान करेंगी।

सावन माह भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे माह देशभर से लाखों श्रद्धालु विभिन्न पवित्र स्थलों से जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसी कड़ी में कुसुम साहू ने भी एक अनूठे संकल्प के साथ पिछले दो साल से यह कठिन यात्रा शुरू की है। उन्होंने कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित झरनाकुंड धाम (तिलैया) से 21 लीटर जल उठाया और पैदल देवघर के लिए रवाना हुईं।

यात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत में कुसुम साहू ने बताया कि उनकी कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य समाज में गौ सेवा और गौरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में लोग गायों को पालने के बाद उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। इससे गायें सड़क किनारे और कूड़े के ढेर में प्लास्टिक तथा अन्य हानिकारक वस्तुएं खा लेती हैं, जिससे उनकी असमय मृत्यु हो जाती है।

उन्होंने कहा, “गौरक्षा ही मेरा संकल्प है। बाबा भोलेनाथ से प्रार्थना है कि वे हमारी मनोकामनाएं पूर्ण करें और समाज में गौ सेवा की भावना बढ़े। मैं जहां-जहां से गुजर रही हूं, वहां लोगों से आग्रह कर रही हूं कि गायों को खुले में न छोड़ें। यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए तो गौ माता की रक्षा संभव है।”

कुसुम साहू ने सरकार से भी इस दिशा में प्रभावी पहल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई गरीब परिवार आर्थिक तंगी के कारण गायों के चारा-पानी की उचित व्यवस्था नहीं कर पाते, जिसके कारण मजबूरी में उन्हें खुला छोड़ देते हैं। सरकार यदि गौपालकों के लिए सहायता योजना, चारा उपलब्धता और गौ संरक्षण को लेकर व्यापक अभियान चलाए तथा उसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाए, तो इससे गौवंश की स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।

उन्होंने बताया कि उनकी यह पदयात्रा कोडरमा जिले के तिलैया से शुरू होकर नवलशाही,धोधथंबा, बलहारा, डोरंडा, खोरीमहुआ होते हुए पांचवें दिन जमुआ पहुंची। यहां से वे लंगटा बाबा मंदिर में विश्राम करेंगी और अगले दिन देवघर के लिए अपनी यात्रा आगे बढ़ाएंगी, जहां बाबा बैद्यनाथ के दरबार में 21 लीटर जल से जलाभिषेक कर गौरक्षा एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।

जमुआ में उनके स्वागत के दौरान श्रद्धालुओं ने “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष लगाए। स्थानीय लोगों ने उनके इस संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक यात्रा के साथ सामाजिक संदेश जोड़ना समाज के लिए प्रेरणादायक पहल है। कुसुम साहू की यह यात्रा श्रद्धा, सेवा और सामाजिक जागरूकता का अनूठा उदाहरण बन गई है।

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