झारखंडधाम में अतिक्रमण पर प्रशासन सख्त, 197 दुकानों को नोटिस; तय समय में नहीं हटे तो चलेगा बुलडोजर

मंदिर-मेला परिसर की जमीन से अतिक्रमण हटाने की तैयारी, दुकानदारों ने मांगी वैकल्पिक व्यवस्था

Abhimanyu Kumar
2 Min Read
Highlights
  • झारखंडधाम में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन सख्त
  • 197 दुकानदारों को जारी किया गया नोटिस
  • 14 एकड़ में चार एकड़ से अधिक जमीन अतिक्रमण की चपेट में
  • दुकानदारों ने मांगी वैकल्पिक जगह और पुनर्वास
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झारखंडधाम/संवाददाता। जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल झारखंडधाम में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है। मंदिर और मेला परिसर की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए दुकानदारों को निर्धारित समय में कब्जा खाली करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन के अनुसार, तय अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो नियमानुसार अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

 

उपायुक्त के निर्देश पर जमुआ के अंचलाधिकारी नरेश वर्मा ने झारखंडधाम को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की है। अंचल कार्यालय की ओर से मंदिर की जमीन पर अवैध रूप से निर्मित 197 दुकानों के संचालकों को नोटिस जारी किए जाने की बात कही गई है।

प्रशासन का कहना है कि श्रावणी मेले के दौरान अतिक्रमण के कारण श्रद्धालुओं के आवागमन में परेशानी हुई। इससे मेला परिसर का क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है। बताया गया कि झारखंडधाम में मंदिर और मेला परिसर के लिए करीब 14 एकड़ जमीन है, जिसमें चार एकड़ से अधिक भूमि अतिक्रमण की चपेट में है।

स्थानीय दुकानदार

सीओ नरेश वर्मा के अनुसार, झारखंडधाम की प्रमुख समस्याओं में अतिक्रमण शामिल है। नोटिस के बावजूद निर्धारित समय में अतिक्रमण नहीं हटाने पर प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई करेगा और अवैध निर्माण को हटाया जाएगा।

दुकानदारों ने मांगी वैकल्पिक व्यवस्था

प्रशासन की कार्रवाई की सूचना के बाद दुकानदारों में चिंता बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि दुकानें हटाने से उनके सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने प्रशासन से अतिक्रमण हटाने से पहले वैकल्पिक रोजगार या दुकान लगाने के लिए स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है।

 

कुछ दुकानदारों का यह भी कहना है कि उन्हें अभी तक आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है। ऐसे दुकानदारों ने कहा कि नोटिस मिलने के बाद ही वे आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगे। दुकानदारों ने प्रशासन से अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ उनके पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था पर भी विचार करने की मांग की है।

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