झारखंड में चिकित्सा शिक्षा का बड़ा विस्तार: 8 साल में 5.5 गुना बढ़ीं MBBS सीटें, 300 से आंकड़ा पहुंचा 1,650 , पढ़े पूरी ख़बर …

गाँव-गाँव पहुंचेगा बेहतर इलाज, जब हर साल तैयार होंगे 1650 डॉक्टर

Abhimanyu Kumar
3 Min Read
झारखंड में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार: 8 साल में 5.5 गुना बढ़ीं MBBS सीटें, 300 से बढ़कर संख्या 1,650 हुई।
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रांची: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने की दिशा में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में जहां राज्य में एमबीबीएस की महज 300 सीटें थीं, वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या 5.5 गुना बढ़कर 1,650 तक पहुंच गई है।

दो साल में डॉक्टरों की कमी पाटने की तैयारी

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य अगले दो वर्षों में डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और ग्रामीण अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक बनाने, फैकल्टी की कमी दूर करने तथा सरकारी अस्पतालों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों का गणित

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के आंकड़ों और विभागीय जानकारी के मुताबिक, राज्य के प्रमुख सरकारी व निजी संस्थानों में सीटों की स्थिति इस प्रकार है:

  रिम्स (RIMS), रांची: एमबीबीएस सीटें 180 से बढ़ाकर 250 की गईं।

 एमजीएम (MGM), जमशेदपुर: क्षमता 50 से बढ़कर 150 हुई।

  एसएनएमएमसीएच (SNMMCH), धनबाद: सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 100 की गई।

 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज: दुमका (फूलो झानो), पलामू (मेदिनीराय) और हजारीबाग (शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज) में 100-100 एमबीबीएस सीटों पर दाखिला जारी है।

 निजी एवं डीम्ड संस्थान: मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज (जमशेदपुर), लक्ष्मी चंद्रवंशी मेडिकल कॉलेज (पलामू), और नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज (सरायकेला) में भी सीटों की क्षमता का विस्तार हुआ है।

बुनियादी ढांचे और फैकल्टी पर जोर

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केवल सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण (क्लिनिकल ट्रेनिंग) और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। सरकार की प्राथमिकता है कि झारखंड से तैयार होने वाले चिकित्सक राज्य के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दें, ताकि आम जनता को बुनियादी इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।

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