तीन साल से कैंसर से जिंदगी की जंग लड़ रही गिरिडीह की बेटी संजू, अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लगाई जीवनदान की गुहार…

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कहते हैं ‘गरीब की हाय और बीमारी दोनों घर को उजाड़ देती हैं’—यह कहावत आज जमुआ प्रखंड अंतर्गत नवाडीह पंचायत के सखैबाद (दुम्मा) निवासी राजू ठाकुर के घर पर पूरी तरह सटीक बैठ रही है। उनकी 20 वर्षीय पुत्री संजू कुमारी पिछले तीन वर्षों से लिवर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही हैं। पहले से ही अभावों में जी रहे इस गरीब परिवार पर कैंसर का यह पहाड़ टूट पड़ा है, जिससे आज संजू बिस्तर पर असहनीय दर्द से कराह रही है और लाचार माता-पिता बेबसी के आंसू बहाने को मजबूर हैं।

इलाज में बिक गए गहने और जमा-पूंजी, अब दाने-दाने को मोहताज परिवार

बेसहारा परिवार, बेटी के इलाज में सब कुछ गंवाया; अब दो वक्त की रोटी के भी पड़े लाले…

अपनी लाडली की जान बचाने के लिए माता-पिता ने अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई झोंक दी। घर की जमा-पूंजी से लेकर मां के जेवर तक सब इलाज की भेंट चढ़ गए। तीन साल तक चले लंबे और महंगे इलाज ने इस परिवार की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। अब स्थिति यह आ पहुंची है कि पैसों के घोर अभाव में आगे का इलाज पूरी तरह ठप होने की कगार पर है।

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दर्दनाक है संजू की हालत

संजू की शारीरिक स्थिति बेहद दयनीय और पीड़ादायक हो चुकी है। कैंसर के गंभीर असर के चलते वह सामान्य रूप से शौच करने में भी असमर्थ हैं और प्लास्टिक बैग (स्टोमा बैग) के सहारे दिन काटने को विवश हैं। 20 साल की उम्र में अपनी बेटी को इस नारकीय दर्द में तड़पते देख बेबस माता-पिता के सामने अब आंसुओं के सिवा कुछ नहीं बचा है।

सोशल मीडिया पर उठी मदद की आवाज, सीएम से संज्ञान लेने की मांग

इस हृदयविदारक मामले को स्थानीय पत्रकार संतू सिंह ने अपने सोशल मीडिया (X) हैंडल पर प्रमुखता से उठाते हुए माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन, मंत्री इरफान अंसारी, स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और कुणाल षाड़ंगी को टैग कर मदद की गुहार लगाई।

पत्रकार की इस पहल के बाद समाजसेवी एवं नेत्री ब्यूटी मंडल ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार से त्वरित सहायता की अपील की। उन्होंने लिखा:

 “गिरिडीह (जमुआ) की 20 वर्षीय बेटी संजू कुमारी पिछले 3 साल से लिवर कैंसर से जूझ रही है। आर्थिक रूप से टूट चुके माता-पिता अब इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी, कृपया इस अत्यंत संवेदनशील मामले का संज्ञान लें और संजू को जीवनदान देने में मदद करें।”

प्रशासनिक संज्ञान और सरकारी मदद का इंतजार

एक बेबस बेटी की सांसें अब केवल सरकारी सहायता और संवेदनशील नागरिकों के सहयोग पर टिकी हैं। संजू के परिजनों की पथराई आंखें अब राज्य के मुखिया हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य विभाग की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही हैं। देखना यह होगा कि सरकार और जिला प्रशासन इस अत्यंत मार्मिक मामले पर कितनी तत्परता से संज्ञान लेकर संजू को नया जीवन देने के लिए आगे आता है।