रांची: रांची में 9 अक्टूबर को होने वाले भारत-वेस्टइंडीज टी-20 मुकाबले से पहले टिकटों की कथित कालाबाजारी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्टेडियम के आसपास टिकटों को निर्धारित कीमत से दोगुने-तिगुने दाम पर बेचे जाने की शिकायतों के बीच अब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस मामले को उठाया है।
आरोप है कि टिकट हासिल करने के लिए दिहाड़ी मजदूरों, रेजा-कुलियों और अन्य जरूरतमंद लोगों को लंबी कतारों में खड़ा करवाया जा रहा है। इसके बाद खरीदे गए टिकटों को कथित तौर पर ऊंची कीमत पर बेचने का खेल चल रहा है। मीडिया रिपोर्टों में भी 2 हजार रुपये के टिकट को 4 हजार और 2500 रुपये के टिकट को 5 हजार रुपये तक में बेचने के आरोप सामने आए हैं।
मामले को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए टिकटों की कथित कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे मामले के बीच रांची पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से मैच से पहले टिकटों की कालाबाजारी और साइबर फ्रॉड पर निगरानी रखने की बात कही गई है। अधिकारियों ने दर्शकों से केवल अधिकृत काउंटर या आधिकारिक माध्यमों से टिकट खरीदने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने की अपील की है।
क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि टिकटों की कथित कालाबाजारी से उन आम दर्शकों को नुकसान हो रहा है, जो परिवार और बच्चों के साथ मैच देखने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऑनलाइन टिकटों की भारी मांग के बीच टिकट महज 17 मिनट में बिकने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
अब सवाल यह है कि टिकटों की कथित कालाबाजारी में शामिल लोगों की पहचान कर प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है और आम क्रिकेट प्रेमियों को टिकट उचित कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
