झारखंड के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव न कराए जाने को लेकर छात्रनेता और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के पूर्व रांची महानगर संगठन मंत्री अभिनव जीत ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा कि छात्रसंघ चुनाव नहीं कराना, छात्रों को उनके अधिकारों से वंचित करने जैसा है।
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अभिनव जीत ने कहा, “राज्य के कई विश्वविद्यालयों में वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं, जिससे छात्रों की समस्याओं को उठाने वाला कोई मंच नहीं बचा है। एक ओर विश्वविद्यालय प्रशासन हर साल छात्रों से 50 से 100 रुपये तक शुल्क वसूलता है, वहीं दूसरी ओर छात्रसंघ चुनाव कराने में पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।”
उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव केवल छात्रहित से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की पहली सीढ़ी भी है। इससे छात्रों को नेतृत्व विकसित करने का अवसर मिलता है और वे अपनी समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचा पाते हैं। मगर झारखंड में 2019 के बाद अब तक किसी भी विश्वविद्यालय या महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुआ है।

छात्रनेता ने यूनिवर्सिटी एक्ट और लिंगदोह समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि हर शैक्षणिक सत्र में छात्रसंघ चुनाव कराना विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। उन्होंने राज्यपाल एवं कुलाधिपति से छात्रसंघ चुनाव को तत्काल बहाल कराने की मांग की है।
“कैंपस में पढ़ने वाले छात्रों के लिए छात्रसंघ चुनाव किसी त्योहार से कम नहीं है। यह छात्रों के हक की आवाज को बुलंद करने का जरिया है,” – उन्होंने कहा।
छात्रों के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अभिनव ने सभी विश्वविद्यालयों में इसी सत्र से छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की है।

मैं अभिमन्यु कुमार पिछले चार वर्षों से गिरिडीह व्यूज में बतौर “चीफ एडिटर” के रूप में कार्यरत हुं,आप मुझे नीचे दिए गए सोशल मीडिया के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।