जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले में एक और सफल अभ्यर्थी गिरफ्तार

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रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) में कथित अनियमितता और पेपर लीक मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को एक और बड़ी सफलता मिली है। सीआईडी ने मामले में रविवार को एक और सफल अभ्यर्थी समीर कुमार को गिरफ्तार किया है। समीर कुमार गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है।

समीर की गिरफ्तारी के साथ ही जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में सीआईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए सफल अभ्यर्थियों की संख्या सात हो गई है। जांच एजेंसी इससे पहले सफल अभ्यर्थी दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी, आनंद कुमार सिंह, अक्षय तिवारी और सुषमा कुमारी को गिरफ्तार कर चुकी है।

छह अन्य सफल अभ्यर्थी पहले हो चुके हैं गिरफ्तार

सीआईडी की कार्रवाई में सबसे पहले धनबाद के नावाडीह थाना क्षेत्र स्थित डुप्लेक्स सनशाइन अपार्टमेंट निवासी दीपक कुमार की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के काकिला डयूल निवासी उमेश कुमार राय को गिरफ्तार किया गया। उमेश वर्तमान में बोकारो के दुग्दा थाना क्षेत्र की न्यू बीसीसीएल कॉलोनी स्थित क्वार्टर नंबर एम-25/3 में रह रहा था।

मामले में तीसरे सफल अभ्यर्थी के तौर पर विजय कुमार तिवारी की गिरफ्तारी हुई। वह धनबाद जिले के राजगंज थाना क्षेत्र के रोआम धड़कीड़ो का रहने वाला बताया गया है। इसके बाद बिहार के छपरा जिले के कोपा थाना क्षेत्र के चतरा गांव निवासी आनंद कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। आनंद वर्तमान में धनबाद के सुदामडीह थाना क्षेत्र स्थित सुदामडीह रिवरसाइड मार्केट में रह रहा था।

सीआईडी ने इसके बाद अक्षय तिवारी और सुषमा कुमारी को भी गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि अक्षय तिवारी, जेपीएससी की परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी का भाई है, जबकि सुषमा कुमारी अभय तिवारी की पत्नी बताई गई है।

अभय तिवारी भी जांच एजेंसी की गिरफ्त में

मामले में अभय तिवारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उसकी गिरफ्तारी जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार, अभय तिवारी पर जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है। उसे इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड भी बताया जा रहा है।

एक जनवरी 2025 को दर्ज हुआ था मामला

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितता को लेकर सीआईडी थाना कांड संख्या 01/2025 एक जनवरी 2025 को दर्ज किया गया था। इसी मामले की जांच के दौरान सीआईडी ने परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच शुरू की।

जांच के दौरान एजेंसी को गिरफ्तार किए गए सफल अभ्यर्थियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर दलालों और एजेंटों के माध्यम से पैसे देकर परीक्षा के प्रश्न पहले हासिल किए और उनके उत्तर याद कर परीक्षा में सफलता प्राप्त की।

रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ

अब सीआईडी गिरफ्तार किए गए सभी सफल अभ्यर्थियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। पूछताछ के दौरान एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित पेपर लीक का नेटवर्क किस तरह काम करता था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, अभ्यर्थियों से कितनी रकम ली गई और लीक प्रश्नपत्र अथवा उसके उत्तर उन तक किस माध्यम से पहुंचाए गए।

साथ ही जांच एजेंसी कथित दलालों, एजेंटों और परीक्षा से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। समीर कुमार की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना भी बढ़ गई है।

सीआईडी की जांच का मुख्य फोकस कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क का पता लगाने और इसमें शामिल सभी आरोपियों तक पहुंचने पर है। आने वाले दिनों में रिमांड पर पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई और अहम तथ्य सामने आने की उम्मीद है।