रांची/झारखंड: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा और इसके माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाई कोर्ट ने अहम निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट के इस फैसले से सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुके करीब 2,300 चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल परीक्षा में सफल होकर विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्त अभ्यर्थी अपने पदों पर बने रहेंगे और पहले की तरह अपनी सेवाएं देते रहेंगे। हालांकि, कथित पेपर लीक और परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर CID की जांच जारी रहेगी।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इससे पहले 8 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को फैसला आने के बाद लंबे समय से असमंजस में चल रहे चयनित अभ्यर्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की निगाहें इस निर्णय पर टिकी थीं।
पूरी परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को दी गई थी चुनौती
दरअसल, JSSC-CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद राज्य में काफी विवाद हुआ था। इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों ने आंदोलन भी किया था। वहीं, झारखंड सरकार ने CID की जांच रिपोर्ट और छात्र आंदोलनों के बाद JSSC-CGL परीक्षा प्रक्रिया तथा इसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी।
राज्य सरकार के इस फैसले से परीक्षा में सफल होकर सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के सामने नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया था। इसके बाद सफल अभ्यर्थी आकाश गौरव समेत अन्य अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत में पक्ष रखते हुए दलील दी थी कि कुछ अभ्यर्थियों के खिलाफ कथित अनियमितता के आरोप सामने आने के आधार पर पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।
उनका कहना था कि यदि कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में अनुचित तरीके अपनाए हैं या पेपर लीक में उनकी संलिप्तता सामने आई है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को दूसरों की कथित गड़बड़ी की सजा नहीं दी जानी चाहिए।
465 संदिग्ध अभ्यर्थियों को जारी किया गया था नोटिस
जांच के दौरान राज्य सरकार की ओर से करीब 465 संदिग्ध अभ्यर्थियों को चिह्नित कर नोटिस जारी किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने इसी आधार पर अदालत के समक्ष यह सवाल उठाया कि जब संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके खिलाफ जांच और कार्रवाई की जा सकती है, तो फिर पूरी परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने की आवश्यकता क्यों है?
अभ्यर्थियों का तर्क था कि जांच में जिन लोगों की संलिप्तता प्रमाणित होती है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन हजारों निर्दोष और मेहनत के दम पर सफल हुए अभ्यर्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में नहीं डाला जाना चाहिए।
700 से अधिक सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ, 25 आरोपित गिरफ्तार
दूसरी ओर, JSSC-CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच झारखंड CID की विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा की जा रही है। जांच के दौरान अब तक 700 से अधिक सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की जा चुकी है। वहीं, इस मामले में 13 सफल अभ्यर्थियों समेत कुल 25 आरोपितों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
गिरफ्तार सफल अभ्यर्थियों में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक और फूड इंस्पेक्टर जैसे महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर कार्यरत लोग भी शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपितों को रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेजा गया है।
CID की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा में कथित पेपर लीक किस तरह हुआ, किन लोगों ने इसका लाभ उठाया और इस पूरे मामले के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
नौकरी जारी रहेगी, लेकिन जांच से नहीं मिलेगी छूट
हाई कोर्ट के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि फिलहाल उनकी नौकरी पर कोई संकट नहीं रहेगा। करीब 2,300 अभ्यर्थी अपने-अपने पदों पर काम करते रहेंगे। हालांकि, इस फैसले का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जांच समाप्त हो गई है या सभी अभ्यर्थियों को जांच से छूट मिल गई है।
CID अपनी जांच जारी रखेगी और यदि किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
कुल मिलाकर, झारखंड हाई कोर्ट के इस फैसले ने JSSC-CGL के माध्यम से नौकरी प्राप्त करने वाले हजारों अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत दी है। वहीं, कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के मामले में जांच जारी रहने से दोषियों पर कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है।
अब सभी की निगाहें CID की आगे की जांच और उसमें सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।