Success Story: जिस JEE परीक्षा में कभी हुए थे असफल, उसी के बने चेयरमैन; आज IIT मद्रास के डायरेक्टर हैं प्रो. वी कामकोटी, छात्रों को दिया सफलता का बड़ा मंत्र

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ई दिल्ली। जीवन में सफलता का रास्ता हमेशा सीधा और आसान नहीं होता। कई बार असफलताएं ही भविष्य की बड़ी सफलताओं की नींव बनती हैं। इसका जीवंत उदाहरण हैं IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामकोटी, जिन्होंने कभी JEE की तैयारी के दौरान केमिस्ट्री विषय में 100 में केवल 1 अंक प्राप्त किया था। उस समय यह उनके लिए बेहद निराशाजनक क्षण था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यही कारण है कि बाद के वर्षों में वे उसी JEE परीक्षा के चेयरमैन बने और आज देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान IIT मद्रास का नेतृत्व कर रहे हैं।

 

प्रोफेसर वी कामकोटी की यह कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो किसी परीक्षा में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर खुद को असफल मान लेते हैं। उनका मानना है कि जीवन में असफलता जैसी कोई चीज नहीं होती, बल्कि हर असफलता सीखने और आगे बढ़ने का अवसर होती है।

FAIL का असली मतलब समझना जरूरी

IIT मद्रास की आधिकारिक वेबसाइट पर साझा किए गए अपने अनुभव में प्रोफेसर कामकोटी ने कहा कि दुनिया के महान विचारकों और शिक्षाविदों ने हमेशा यह संदेश दिया है कि असफलता अंत नहीं होती। उन्होंने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि FAIL का अर्थ है “First Attempt In Learning” अर्थात सीखने का पहला प्रयास।

उनका कहना है कि किसी परीक्षा में खराब प्रदर्शन या कम अंक आने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति जीवन में सफल नहीं हो सकता। सफलता को केवल अंकों, ग्रेड और रैंक से नहीं मापा जा सकता।

जब केमिस्ट्री में मिला था सिर्फ एक अंक

प्रोफेसर कामकोटी ने बताया कि वर्ष 1985 में JEE की तैयारी के दौरान उन्हें केमिस्ट्री विषय में मात्र एक अंक प्राप्त हुआ था। यह उनके लिए अत्यंत निराशाजनक अनुभव था। उस समय उन्हें भी लगा कि उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा है।

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हालांकि, उन्होंने इस परिणाम को अपनी क्षमता का अंतिम आकलन नहीं माना। उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी, अपनी कमजोरियों पर काम किया और आगे बढ़ते रहे। समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई और वे शिक्षा तथा शोध के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।

 

उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि एक परीक्षा या एक परिणाम किसी व्यक्ति के पूरे जीवन का निर्णय नहीं कर सकता।

जिस परीक्षा में संघर्ष किया, उसी के चेयरमैन बने

प्रोफेसर कामकोटी की सफलता का सबसे प्रेरक पहलू यह है कि जिस JEE परीक्षा में कभी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, बाद में वे उसी परीक्षा के चेयरमैन बने। यह उपलब्धि बताती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सकारात्मक सोच के बल पर कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है।

उनका मानना है कि असफलता को हार मानने के बजाय उसे सीखने और सुधारने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

IIT मद्रास से की उच्च शिक्षा

प्रोफेसर वी कामकोटी ने IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमएस और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 2001 में वे IIT मद्रास के फैकल्टी सदस्य बने। इसके बाद उन्होंने संस्थान में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

 

जनवरी 2022 में उन्होंने IIT मद्रास के निदेशक का पदभार संभाला। इसके अलावा वे भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। संस्थान में उन्होंने इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एंड स्पॉन्सर्ड रिसर्च के एसोसिएट डीन और JEE चेयरमैन जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

हर बच्चा अलग होता है

प्रोफेसर कामकोटी का मानना है कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता, रुचि और प्रतिभा अलग होती है। इसलिए बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि माता-पिता की भूमिका बच्चों को सही दिशा देना है, लेकिन यह दिशा उनकी रुचि और क्षमता को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए। केवल अंक और रैंक किसी बच्चे की पूरी योग्यता को नहीं दर्शाते।

उनके अनुसार बच्चों पर अत्यधिक दबाव डालना कई बार मानसिक तनाव, चिंता और भावनात्मक समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए परिवार और समाज को बच्चों के विकास के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

असफलता नहीं, सोच बदलने की जरूरत

IIT मद्रास के निदेशक का कहना है कि अक्सर छात्र अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर उसे अपनी सबसे बड़ी असफलता मान लेते हैं। कई बार यह निराशा गलत अपेक्षाओं, सामाजिक दबाव या अपनी वास्तविक रुचि से अलग क्षेत्र में आगे बढ़ने के कारण पैदा होती है।

उन्होंने कहा कि छात्रों और अभिभावकों दोनों को अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। असफलता को अंत नहीं बल्कि सुधार, अनुभव और सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए।

जीवन केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं

प्रोफेसर कामकोटी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जीवन केवल पढ़ाई और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। समाज के विकास में हर क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चाहे वह कंप्यूटर साइंस हो, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, ओशन इंजीनियरिंग, बायोलॉजिकल साइंस या कोई अन्य क्षेत्र, सभी का योगदान समान रूप से महत्वपूर्ण है।

 

उन्होंने कहा कि बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत और सकारात्मक बनाना समय की आवश्यकता है। परिवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी व्यक्तिगत या आर्थिक समस्याओं का नकारात्मक प्रभाव बच्चों पर न पड़े।

प्रेरणा देने वाली सीख

प्रोफेसर वी कामकोटी की कहानी यह संदेश देती है कि असफलता कभी भी सफलता के रास्ते में अंतिम बाधा नहीं होती। यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे, सीखने की इच्छा बनाए रखे और आत्मविश्वास न खोए, तो वह किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकता है।

आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है, ऐसे समय में उनकी यह कहानी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों सभी के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि जीवन की असली सफलता केवल अंकों से नहीं, बल्कि सीखने, संघर्ष करने और आगे बढ़ते रहने की क्षमता से तय होती है।