गिरिडीह: कानून की रक्षा की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर होती है, अगर उन्हीं पर कानून हाथ में लेने का आरोप लगे, तो सवाल उठना लाजिमी है। गिरिडीह जिले के निमियाघाट थाने में पदस्थापित एएसआई सत्येंद्र कुमार पर एक यात्री बस के सहचालक जाहिद आलम के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि बस में सफर कर रहे उनके परिजनों से किराया लेने को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद जीटी रोड पर बस रुकवाकर मारपीट की गई।
किराया मांगा तो भड़क गए पुलिस पदाधिकारी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सत्येंद्र कुमार के परिजन गढ़वा से यात्री बस में सफर कर रहे थे। इसी दौरान बस के सहचालक जाहिद आलम ने उनसे नियमानुसार किराया लिया। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर सत्येंद्र कुमार ने गिरिडीह के जीटी रोड पर बस रुकवाई और जाहिद आलम के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। घटना में घायल बस सहचालक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वर्दी की ताकत जनता की सुरक्षा के लिए, दबाव बनाने के लिए नहीं
यह मामला एक अहम सवाल खड़ा करता है—क्या वर्दी और पद का इस्तेमाल किसी आम नागरिक पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है? कानून की नजर में हर व्यक्ति समान है। अगर किसी पुलिस पदाधिकारी पर मारपीट का आरोप लगता है, तो मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई जरूरी है।
एसडीपीओ ने की घटना की पुष्टि
डुमरी एसडीपीओ आबिद खान ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि मामले की रिपोर्ट गिरिडीह एसपी को भेजी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की छवि जनता के बीच बेहतर बनाने के प्रयासों के बीच इस तरह के आरोप गंभीर हैं।
बाबूलाल मरांडी ने भी उठाया मामला
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मामले को उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग किया। उन्होंने पुलिस पदाधिकारी पर लगे आरोपों को गंभीर बताते हुए कानून के पालन को लेकर सवाल उठाए।
अब सवाल यह है कि मामले की जांच में क्या सामने आता है और संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है? कानून की वर्दी की असली ताकत उसका रौब नहीं, बल्कि कानून के प्रति जवाबदेही और जनता की सुरक्षा है।
मैं अभिमन्यु कुमार पिछले चार वर्षों से गिरिडीह व्यूज में बतौर “चीफ एडिटर” के रूप में कार्यरत हुं,आप मुझे नीचे दिए गए सोशल मीडिया के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।