जेपीएससी में बड़े सुधारों को लेकर अभ्यर्थियों का सरकार को अल्टीमेटम; 7 अक्टूबर तक मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन का ऐलान….

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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कार्यप्रणाली में सुधार, रिक्त पदों पर नियुक्ति और वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि 7 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो इसके बाद राज्यव्यापी स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद बार-बार सड़कों पर उतरना नहीं है, बल्कि वे व्यवस्था में ऐसा स्थायी और पारदर्शी सुधार चाहते हैं जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में न लटके।

छात्रों की मुख्य मांगें और चिंताएं

 वादे के बाद भी रिफॉर्म कमेटी अधर में: छात्रों का आरोप है कि पिछले आंदोलन के बाद सरकार ने अमिताभ कौशल के नेतृत्व में रिफॉर्म कमेटी गठित करने का भरोसा दिया था। दो महीने बीत जाने के बावजूद यह कमेटी कागजों से बाहर नहीं आ सकी है। छात्रों की मांग है कि इस कमेटी का तत्काल गठन हो और इसमें अभ्यर्थियों के वास्तविक मुद्दों को शामिल करने के लिए छात्र प्रतिनिधि भी रखे जाएं।

  यूपीएससी की तर्ज पर जारी हो वार्षिक कैलेंडर: राज्य में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं, लेकिन कोई निश्चित समय-सारणी न होने से तैयारी प्रभावित होती है। छात्रों ने मांग की कि आवेदन, प्रीलिम्स, मेन्स, इंटरव्यू और रिजल्ट की तिथियों के साथ स्पष्ट वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाए।

 अध्यक्ष व सदस्यों के रिक्त पदों पर तत्काल बहाली: आयोग में शीर्ष पदों के खाली रहने से पूरी भर्ती प्रक्रिया की गति थम रही है। सरकार से आयोग को पूर्ण क्षमता के साथ तत्काल सक्रिय करने की मांग की गई।

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 प्रीलिम्स व मेन्स परीक्षा पैटर्न में बदलाव:

   प्रारंभिक परीक्षा में ‘ई-ऑप्शन’ और नेगेटिव मार्किंग के प्रावधानों की समीक्षा हो तथा श्रेणीवार कटऑफ और मार्कशीट समय पर जारी की जाए।

    प्रीलिम्स और मेन्स के बीच अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।

  मुख्य परीक्षा से ऑब्जेक्टिव प्रश्न हटाकर शॉर्ट क्वेश्चन जोड़े जाएं।

   मेन्स में झारखंड के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता और उचित वेटेज मिले।

 कॉपियों के मूल्यांकन में शुचिता व पारदर्शिता: मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय व निष्पक्ष रहे। साथ ही जांच प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों और निजी कोचिंग संस्थानों के बीच किसी भी प्रकार का ‘कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ (हितों का टकराव) न हो।

 इंटरव्यू तक पहुंचे अभ्यर्थियों को अवसर: जो अभ्यर्थी साक्षात्कार तक पहुंचकर अंतिम मेरिट में मामूली अंतर से चूक जाते हैं, उनके लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर रोजगार के वैकल्पिक अवसरों की नीति बनाई जाए।